Prashant Mahasagar in Hindi | प्रशांत महासागर की सम्पूर्ण जानकारी
प्रस्तावना (Introduction)
प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) विश्व का सबसे विशाल, सबसे गहरा और सबसे महत्वपूर्ण महासागर है। यह पृथ्वी की सतह के लगभग एक-तिहाई भाग को घेरे हुए है और अपने अंदर असंख्य द्वीप, गहरे गर्त, सक्रिय ज्वालामुखी, भूकंपीय क्षेत्र तथा समृद्ध समुद्री जैव विविधता को समेटे हुए है। भूगोल (Geography) की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि जलवायु, व्यापार, परिवहन और मानव सभ्यता के विकास में भी प्रशांत महासागर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, SSC, रेलवे, TET, CTET, State PCS आदि में Prashant Mahasagar in Hindi से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। इसी कारण यह विषय छात्रों और सामान्य ज्ञान के पाठकों दोनों के लिए बेहद उपयोगी है।
इस लेख में हम प्रशांत महासागर का क्षेत्रफल, गहराई, भौगोलिक स्थिति, सीमाएँ, द्वीप, सीमांत सागर, महासागरीय कटक, जलवायु प्रभाव, आर्थिक महत्व और इससे जुड़े रोचक तथ्यों को विस्तार से समझेंगे।
प्रशांत महासागर का परिचय
प्रशांत महासागर विश्व का सबसे बड़ा महासागर है। इसका नामकरण 1520 ई. में प्रसिद्ध समुद्री यात्री फर्डिनेंड मैगेलन ने किया था। जब उन्होंने इस महासागर को पार किया, तब समुद्र अपेक्षाकृत शांत था, इसलिए उन्होंने इसे Pacific (शांत) कहा। हालांकि वास्तव में यह महासागर दुनिया का सबसे अधिक सक्रिय भूकंपीय और ज्वालामुखीय क्षेत्र माना जाता है।
प्रशांत महासागर का क्षेत्रफल व विस्तार
प्रशांत महासागर विश्व का सबसे बड़ा महासागर है जो सम्पूर्ण पृथ्वी के एक तिहाई भाग पर फैला हुआ हैं। इसका क्षेत्रफल 165,246,200 वर्ग किलोमीटर हैं जो पृथ्वी के सभी स्थलों (द्वीप एवं महाद्वीपों) के सयुंक्त क्षेत्रफल से भी अधिक है और अटलांटिक महासागर के दुगुने से भी अधिक हैं।
इसकी औसत गहराई लगभग 14000 फुट हैं तथा अधिकतम गहराई (मरियानाट्रेंच में चैलेंजर डीप की) समुद्रतल से लगभग 36,070 फुट नीचे हैं। इसका धरातल लगभग समतल हैं एवं इसकी आकृति अर्धवृत्ताकार आकार की हैं।
प्रशांत महासागर की सीमा 55 देशों के साथ लगती हैं जिनमें रूस, अमेरिका, कनाडा, जापान, ऑस्ट्रेलिया और चीन जैसे देश शामिल हैं। यह अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और एशिया महाद्वीप को एक दूसरे से अलग करता हैं। भूमध्य रेखा इसके लगभग बीचो बीच से होकर गुजरती हैं।
प्रशांत महासागर का कुल क्षेत्रफल लगभग 165,246,200 वर्ग किलोमीटर है, जो पृथ्वी के समस्त स्थलीय भाग (महाद्वीपों व द्वीपों) के संयुक्त क्षेत्रफल से भी अधिक है। यह अटलांटिक महासागर से लगभग दोगुना बड़ा है।
यह महासागर उत्तर में आर्कटिक महासागर, दक्षिण में दक्षिणी महासागर, पूर्व में उत्तर व दक्षिण अमेरिका तथा पश्चिम में एशिया और ऑस्ट्रेलिया से घिरा हुआ है। भूमध्य रेखा (Equator) प्रशांत महासागर के लगभग मध्य से होकर गुजरती है, जिससे इसका जलवायु पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।
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प्रशांत महासागर की गहराई
प्रशांत महासागर न केवल क्षेत्रफल में सबसे बड़ा है, बल्कि गहराई में भी यह विश्व में प्रथम स्थान पर है।
- औसत गहराई: लगभग 14,000 फुट
- अधिकतम गहराई: लगभग 36,070 फुट
इसकी सबसे गहरी जगह मरियाना ट्रेंच (Mariana Trench) में स्थित चैलेंजर डीप (Challenger Deep) है, जो समुद्र तल से भी अत्यधिक नीचे स्थित है। यह पृथ्वी का सबसे गहरा ज्ञात बिंदु है।
प्रशांत महासागर की आकृति और धरातल
प्रशांत महासागर की आकृति सामान्यतः अर्धवृत्ताकार मानी जाती है। इसका धरातल अधिकांशतः समतल है, लेकिन इसमें गहरे गर्त (Trenches), महासागरीय कटक (Ridges) और पठार भी पाए जाते हैं।
इस महासागर में अटलांटिक और हिंद महासागर की तरह मध्य में निरंतर फैला हुआ कटक नहीं पाया जाता, बल्कि इसके कटक किनारों और द्वीपों के आसपास अधिक केंद्रित हैं।
प्रशांत महासागर की सीमाएँ और तटीय देश
प्रशांत महासागर की सीमा लगभग 55 देशों से लगती है। इनमें प्रमुख देश हैं:
- रूस
- संयुक्त राज्य अमेरिका
- कनाडा
- जापान
- चीन
- ऑस्ट्रेलिया
- इंडोनेशिया
- फिलीपींस
- चिली
- पेरू
यह महासागर एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका महाद्वीपों को एक-दूसरे से अलग करता है और वैश्विक समुद्री व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पूर्वी और पश्चिमी तटों में भौगोलिक अंतर
प्रशांत महासागर के पूर्वी और पश्चिमी तटों में स्पष्ट भौगोलिक अंतर देखने को मिलता है।
पूर्वी तट (Eastern Margin)
- यहाँ रॉकी पर्वतमाला और एंडीज पर्वतमाला स्थित हैं।
- तट अपेक्षाकृत संकीर्ण और खड़ी ढाल वाले हैं।
- भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियाँ अधिक पाई जाती हैं।
पश्चिमी तट (Western Margin)
प्रशांत महासागर के द्वीप
इस महासागर में 20,000 द्वीप हैं। कुछ द्वीप धंसे हुए हैं (जैसे-एल्यूशिनयन), तो कुछ द्वीप चाप के रूप में (जैसे- न्यूज़ीलैण्ड, इंडोनेशिया, जापान आदि) समुद्र में कुछ द्वीप बिंदु के रूप में बिखरे हुए हैं, जैसे- कुक द्वीप, सोसाइटी द्वीप, पोलिनेशियाई द्वीप आदि।

दक्षिण-पश्चिम के द्वीपों को निम्नलिखित तीन समूहों में विभाजित किया जाता है:
- मेलानिशिया (Melanesia): सोलोमन द्वीप, फिजी द्वीप, न्यू एलिस एवं अन्य द्वीप।
- माइक्रोनेशिया (Micronesia): कैरोलाइन्स, मार्शल, गिल्बर्ट एलिस एवं अन्य द्वीप।
- पोलीनेशिया (Polynesia): लाइन, कुक, सोसाइटी, टुआभाटो आदि।
- कुछ द्वीप डूबे हुए हैं, जैसे – एल्यूशियन द्वीप
- कुछ द्वीप चाप (Island Arc) के रूप में हैं, जैसे – जापान, इंडोनेशिया, न्यूज़ीलैंड
- कुछ द्वीप बिंदु के रूप में बिखरे हुए हैं, जैसे – कुक द्वीप, सोसाइटी द्वीप
दक्षिण-पश्चिमी द्वीप समूह
प्रशांत महासागर के दक्षिण-पश्चिमी द्वीपों को मुख्यतः तीन भागों में बाँटा गया है:
1. मेलानेशिया (Melanesia)
- सोलोमन द्वीप
- फिजी द्वीप
- न्यू एलिस द्वीप
2. माइक्रोनेशिया (Micronesia)
- कैरोलाइन द्वीप
- मार्शल द्वीप
- गिल्बर्ट एलिस द्वीप
3. पोलीनेशिया (Polynesia)
- लाइन द्वीप
- कुक द्वीप
- सोसाइटी द्वीप
- टुआमोटू द्वीप
प्रशांत महासागर का महाद्वीपीय मग्न ढाल
प्रशांत महासागर का पश्चिमी महाद्वीपीय मग्न ढाल पूर्वी मग्न ढाल की तुलना में अधिक चौड़ा है। पश्चिमी मग्न ढाल पर जापान सागर, पीला सागर आदि स्थित हैं। ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट पर भी मग्न ढाल अधिक चौड़ा हैं।
- पश्चिमी मग्न ढाल पर जापान सागर, पीला सागर आदि स्थित हैं।
- ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट पर भी मग्न ढाल विस्तृत है।
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प्रशांत महासागर के सीमांत सागर (Marginal Seas)
सीमांत सागर (Marginal Seas)- बेरिंग सागर, ओखोटस्क सागर, जापान सागर, पीला सागर, स. चीन सागर, जावा सागर, सुलु सागर, बांदा सागर आदि प्रशांत महासागर के प्रमुख सीमांत सागर या आंशिक रूप से घिरे हुए सागर हैं।
प्रशांत महासागर के प्रमुख सीमांत सागर निम्नलिखित हैं:
- बेरिंग सागर
- ओखोटस्क सागर
- जापान सागर
- पीला सागर
- दक्षिण चीन सागर
- जावा सागर
- सुलु सागर
- बांदा सागर
ये सागर आंशिक रूप से भूमि से घिरे होते हैं और क्षेत्रीय जलवायु व व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रशांत महासागर के कटक (Ridges)
प्रशांत महासागर का सबसे महत्वपूर्ण कटक पूर्वी प्रशांत कटक (East Pacific Rise) है, जिसे ऐल्बैट्रॉस पठार भी कहा जाता है।
अन्य महत्वपूर्ण कटक- (i) गालापगॉस कटक, जिसकी दो शाखाएं हैं: कारनीज एवं कोकोस (ii) नूज़ीलैण्ड कटक, (iii) हवाई कटक, (iv) नास्का कटक, तथा (v) कैरोलीन-सोलोमन कटक आदि।
प्रशांत महासागर में अटलांटिक एवं हिन्द महासागर के समान कटक महासागर के मध्य में नहीं पाये जाते हैं।
अन्य प्रमुख कटक हैं:
- गालापगॉस कटक (कारनीज एवं कोकोस शाखाएँ)
- न्यूज़ीलैंड कटक
- हवाई कटक
- नास्का कटक
- कैरोलाइन-सोलोमन कटक
रिंग ऑफ फायर और प्रशांत महासागर
प्रशांत महासागर के चारों ओर स्थित ज्वालामुखीय और भूकंपीय क्षेत्र को रिंग ऑफ फायर (Ring of Fire) कहा जाता है।
- विश्व के लगभग 70% सक्रिय ज्वालामुखी इसी क्षेत्र में स्थित हैं।
- भूकंप की घटनाएँ यहाँ सबसे अधिक होती हैं।
प्रशांत महासागर का जलवायु पर प्रभाव
प्रशांत महासागर वैश्विक जलवायु को प्रभावित करता है।
- एल नीनो (El Nino) और ला नीना (La Nina) जैसी घटनाएँ इसी महासागर से जुड़ी हैं।
- मानसून प्रणाली पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ता है।
प्रशांत महासागर का आर्थिक महत्व
- विश्व का लगभग 60% समुद्री व्यापार प्रशांत महासागर से होकर गुजरता है।
- मछली उत्पादन में यह महासागर अग्रणी है।
- खनिज संसाधन, तेल और गैस के भंडार भी यहाँ पाए जाते हैं।
प्रशांत महासागर से जुड़े रोचक तथ्य
- यह विश्व का सबसे बड़ा और सबसे गहरा महासागर है।
- यहाँ सबसे अधिक द्वीप पाए जाते हैं।
- पृथ्वी का सबसे गहरा बिंदु यहीं स्थित है।
निष्कर्ष (Conclusion)
इस प्रकार, प्रशांत महासागर (Prashant Mahasagar in Hindi) न केवल क्षेत्रफल और गहराई में सबसे बड़ा है, बल्कि भौगोलिक, आर्थिक और जलवायु की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रतियोगी परीक्षाओं और सामान्य ज्ञान के लिए यह विषय बेहद उपयोगी है। उम्मीद है कि यह विस्तृत लेख आपको प्रशांत महासागर को सरल और स्पष्ट रूप में समझने में सहायक सिद्ध हुआ होगा। यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो इसे जरूर शेयर करें।
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