भारत का भूगोल | Indian Geography in Hindi – Complete Study Material

भारत का भूगोल (Indian Geography) न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है, बल्कि भारत की प्राकृतिक बनावट, जलवायु, संसाधनों और मानव जीवन को समझने की आधारशिला भी है।

भारत विश्व के प्रमुख देशों में से एक है, जहाँ भौगोलिक विविधता अपने चरम रूप में देखने को मिलती है। हिमालय की ऊँची चोटियों से लेकर दक्षिण के तटीय मैदानों तक और थार के मरुस्थल से लेकर गंगा–ब्रह्मपुत्र के उपजाऊ मैदानों तक, भारत का भूगोल अत्यंत विस्तृत और रोचक है।

यह पेज भारत के भूगोल का Pillar Page (Hub Page) है। यहाँ आपको सभी प्रमुख टॉपिक्स का संक्षिप्त लेकिन स्पष्ट परिचय मिलेगा। प्रत्येक विषय पर विस्तार से जानकारी पाने के लिए नीचे दिए गए संबंधित आर्टिकल्स के लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।

भारत की स्थिति, आकार एवं विस्तार

भारत उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित एक उपोष्णकटिबंधीय देश है। इसकी भौगोलिक स्थिति एशिया महाद्वीप के दक्षिणी भाग में है। भारत का अक्षांशीय विस्तार लगभग 8°4′ उत्तरी अक्षांश से 37°6′ उत्तरी अक्षांश तक तथा देशांतर विस्तार 68°7′ पूर्वी देशांतर से 97°25′ पूर्वी देशांतर तक फैला हुआ है।

कर्क रेखा भारत को लगभग दो समान भागों में विभाजित करती है, जिससे भारत की जलवायु और प्राकृतिक दशाओं पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

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भारत क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा देश है। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 32.8 लाख वर्ग किलोमीटर है। भारत की स्थल सीमा, समुद्री सीमा और पड़ोसी देशों के साथ स्थित सीमाएँ इसकी सामरिक एवं आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाती हैं।

भारत के भौतिक प्रदेश

भारत के भौतिक प्रदेश देश की प्राकृतिक संरचना को दर्शाते हैं। इन्हें मुख्य रूप से हिमालयी पर्वतीय क्षेत्र, उत्तरी मैदानी क्षेत्र, प्रायद्वीपीय पठार, थार का मरुस्थल, तटीय मैदान और द्वीपीय क्षेत्र में विभाजित किया जाता है।

हिमालय पर्वत भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित है और देश की जलवायु, वर्षा तथा नदियों के उद्गम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उत्तरी मैदान गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु नदी प्रणालियों द्वारा निर्मित अत्यंत उपजाऊ क्षेत्र है, जहाँ भारत की अधिकांश जनसंख्या निवास करती है।

प्रायद्वीपीय पठार प्राचीन भूभाग है, जो खनिज संसाधनों से भरपूर है। तटीय मैदान और द्वीप समूह भारत के व्यापार, मत्स्य उद्योग और सामरिक महत्व को बढ़ाते हैं।

भारत की जलवायु

भारत की जलवायु मुख्यतः मानसूनी है। यहाँ ऋतु परिवर्तन स्पष्ट रूप से देखने को मिलता है। ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु, शरद ऋतु, शीत ऋतु और वसंत ऋतु भारत की प्रमुख ऋतुएँ मानी जाती हैं।

दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, क्योंकि अधिकांश वर्षा इसी पर निर्भर करती है।

भारत की विशाल भौगोलिक विविधता के कारण विभिन्न क्षेत्रों में तापमान और वर्षा में भारी अंतर पाया जाता है। हिमालय क्षेत्र ठंडा रहता है, जबकि राजस्थान और दक्कन पठार के कुछ भागों में अत्यधिक तापमान देखने को मिलता है।

👉 पूरा पढ़ें: भारत की जलवायु – ऋतुएँ, मानसून और विशेषताएँ

भारत के जल संसाधन

भारत में जल संसाधनों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ नदियाँ, झीलें, तालाब, भूमिगत जल और हिमनद जल के प्रमुख स्रोत हैं।

गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी नदियाँ कृषि, पेयजल और उद्योगों के लिए जीवनरेखा मानी जाती हैं।

तेजी से बढ़ती जनसंख्या और औद्योगीकरण के कारण जल संकट एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। इसलिए जल संरक्षण और सतत जल प्रबंधन आज के समय की आवश्यकता है।

👉 पूरा पढ़ें: भारत के जल संसाधन – नदियाँ, भूजल एवं संरक्षण

भारत की मिट्टियाँ

भारत की मिट्टियाँ कृषि उत्पादन की आधारशिला हैं। यहाँ विभिन्न प्रकार की मिट्टियाँ पाई जाती हैं, जिनमें जलोढ़ मिट्टी, काली मिट्टी, लाल मिट्टी, लेटराइट मिट्टी और मरुस्थलीय मिट्टी प्रमुख हैं।

प्रत्येक मिट्टी का अपना अलग भौगोलिक वितरण और कृषि महत्व है।

उदाहरण के लिए, जलोढ़ मिट्टी गंगा–ब्रह्मपुत्र मैदान में पाई जाती है और धान व गेहूँ की खेती के लिए उपयुक्त है, जबकि काली मिट्टी कपास उत्पादन के लिए जानी जाती है।

👉 पूरा पढ़ें: भारत की मिट्टियाँ – प्रकार, वितरण और विशेषताएँ

भारत की प्राकृतिक वनस्पति

भारत की प्राकृतिक वनस्पति देश की जलवायु, मिट्टी और स्थलाकृति पर निर्भर करती है। यहाँ उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन, मानसूनी वन, कांटेदार वन, पर्वतीय वन और मैंग्रोव वन पाए जाते हैं।

ये वन न केवल जैव विविधता को संरक्षण देते हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी सहायक होते हैं।

वन संसाधन लकड़ी, औषधीय पौधों और जीव-जंतुओं का आश्रय प्रदान करते हैं। इसलिए वनों का संरक्षण भारत के सतत विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

👉 पूरा पढ़ें: भारत की प्राकृतिक वनस्पति और वन प्रकार

भारत की कृषि

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है। यहाँ खरीफ, रबी और जायद फसलें उगाई जाती हैं। चावल, गेहूँ, दालें, कपास, गन्ना और तिलहन भारत की प्रमुख फसलें हैं।

भारतीय कृषि मानसून पर अत्यधिक निर्भर करती है। आधुनिक तकनीकों, सिंचाई सुविधाओं और हरित क्रांति ने कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की है, लेकिन आज भी कई क्षेत्रों में पारंपरिक कृषि पद्धतियाँ प्रचलित हैं।

👉 पूरा पढ़ें: भारत की कृषि – फसलें, ऋतु और विशेषताएँ

भारत के खनिज एवं ऊर्जा संसाधन

भारत खनिज संसाधनों की दृष्टि से एक समृद्ध देश है। यहाँ लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट, मैंगनीज, अभ्रक और पेट्रोलियम जैसे खनिज पाए जाते हैं। ये संसाधन औद्योगिक विकास की रीढ़ हैं।

कोयला और पेट्रोलियम भारत की प्रमुख ऊर्जा संसाधन हैं, जबकि हाल के वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसे सौर और पवन ऊर्जा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

👉 पूरा पढ़ें: भारत के खनिज एवं ऊर्जा संसाधन – विस्तृत अध्ययन

निष्कर्ष

भारत का भूगोल अत्यंत विस्तृत और विविधतापूर्ण है। इसे समझे बिना न तो भारत की प्राकृतिक विशेषताओं को पूरी तरह जाना जा सकता है और न ही इसकी आर्थिक एवं सामाजिक संरचना को। यह Pillar Page आपको भारत के भूगोल से जुड़े सभी

प्रमुख विषयों का संक्षिप्त लेकिन समग्र परिचय प्रदान करता है। प्रत्येक विषय पर गहराई से अध्ययन करने के लिए ऊपर दिए गए संबंधित लेखों को अवश्य पढ़ें।

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